मुंबईः महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट कर अपनी सियासत की जमीन तैयार करने वाली राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एक बार फिर से उत्तर भारतीयों के साथ गुंडागर्दी की है.
👉मालूम हो कि मंगलवार को मनके के कार्यकर्ता हाथ में लाठी लेकर सड़कों पर उतरे और सामने जो भी उत्तर भारतीय दिखा उसकी बेरहमी से पिटाई करने लगे. यहां तक कि उत्तर भारतीयों को डंडे और लात-घूसों से भी पिटाई की गयी. दरअसल राज ठाकरे की पार्टी ने सांगली में लाठी चलाओ भैय्या हटाओ नाम से पर प्रांतीय हटाओ मुहिम शुरू की है.
👉मनसे का आरोप है कि सांगली स्थित एमआईडीसी में पर उत्तर भारतीयों को नौकरी दी जा रही है. उनकी मांग है कि यहां 80 फीसदी नौकरी सिर्फ और सिर्फ मराठी लोगों को ही दी जाये.
👉मराठी मानुष के मुद्दे पर 2008 में किया था आंदोलन
मालूम हो कि फरवरी 2008 में राज ठाकरे ने कथित उत्तर भारतीयों के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व किया था. 2009 में परीक्षा देने मुंबई गये हिंदी भाषी उम्मीदवारों की पिटाई कर मनसे सुर्खियों में आयी थी. ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने हाल ही में गुजराती भाषियों के खिलाफ भी आंदोलन छेड़ा था. इसके तहत मनसे कार्यकर्ताओं ने दादर और माहिम इलाके में कई दुकानों के गुजराती भाषा में लगे बोर्ड जबरदस्ती हटा दिये थे.
👉पुलिस ने बोर्ड हटाने वाले मनसे के सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया था. फरवरी 2008 में राज ठाकरे ने यूपी और बिहार के लोगों के खिलाफ मनसे के आंदोलन का नेतृत्व किया था. शिवाजी पार्क की एक रैली में राज ने चेतावनी दी, अगर मुंबई और महाराष्ट्र में इन लोगों की दादागिरी जारी रही तो उन्हें महानगर छोड़ने के लिये मजबूर कर दिया जायेगा. केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस दौरान मूक दर्शक बन कर बैठी थी.
*2008 में महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का मिला था नोटिस*
👉उत्तर भारतीयों पर हो रहे हमलों के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट ने साल 2008 में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस प्रदेश में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा गैर मराठियों और उत्तर भारतीयों के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम पर रोक लगाने में सरकार की कथित नाकामी के चलते दिया गया था.
👉इस नोटिश को तात्कालिक मुख्य न्यायाधीश के.जी.बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली न्यायपीठ के द्वारा जारी किया गया था. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में याचिकाकर्ता सलेक चंद जैन के वकील सुग्रीव दुबे ने कहा था कि मनसे नेता राज ठाकरे के बयानों से भड़की भीड़ ने जब दो उत्तर भारतीय डॉक्टरों की हत्या कर दी तब भी राज्य सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाये थे.
👉मनसे द्वारा किये गये हमलों पर देशभर में तीव्र प्रतिक्रिया भी शुरू हो गयी थी. कहा गया था कि इससे देश की अखंडता और एकता पर खतरा पैदा हो गया है.
*कोर्ट से फटकार के बाद राज ठाकरे को मिली थी सशर्त जमानत*
👉उत्तर भारतीयों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद राज ठाकरे को गिरफ्तार कर सशर्त जमानत मिली थी. विक्रोली मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के जमानत के आदेश के मुताबिक राज कभी भी सामाजिक द्वेष फैलाने वाला न तो भाषण देंगे और न ही लेख लिखेंगे. एक बॉन्ड पेपर भर कर ये आश्वस्त करना होगा कि वो कभी भी प्रांतवाद को लेकर जहर उगलने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे और ना ही भीड़ या एक से अधिक संगठित दल को उकसाने की कोशिश करेंगे. खुद राज ठाकरे के वकील ने इस आदेश की तस्दीक की थी. राज ठाकरे के वकील अखिलेश चौबे ने कहा था कि विक्रोली कोर्ट ने राज को ये एहतीयात बरतने को कहा था कि वो पुलिस को मदद करें और सामाजिक द्वेष ना फैलाये.
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