मुंबई। हाजी अली दरगाह के आसपास के इलाके में बढ़ रहे अतिक्रमण पर सुप्रीमकोर्ट ने नाराजगी जताई है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए दरगाह के 908 वर्ग मीटर इलाके में अवैध कब्जे को हटाने का निर्देश दिया है।
जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की डबल बेंच ने दरगाह के पास से अवैध कब्जा हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि, "डिप्टी कलेक्टर दो सप्ताह में यह सुनिश्चित करें कि अदालत के आदेश का पालन हो। अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम होंगे। दरगाह के आसपास सौंदर्यीकरण करना जरूरी है।"
कोर्ट ने साफ किया है कि 171 वर्ग मीटर में मौजूद मस्जिद के इलाके को छोड़कार बाकी इलाके में अतिक्रमण हटाया जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि दरगाह वाला इलाका प्रोटेक्टेड रहेगा।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाजी अली ट्रस्ट द्वारा इसके सौंदर्यीकरण के लिए बनाए प्लान पर अमल करने का निर्देश बीएमसी को दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर बीएमसी चाहे तो अपना नया प्लान भी दे सकती है।कोर्ट ने इस आदेश का पालन करने के लिए 30 जून तक का समय तय किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट भी कह चुका है अतिक्रमण हटाने के लिए
बता दें कि, कुछ महीने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी दरगाह के आसपास का अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद दरगाह ट्रस्ट ने कुछ अतिक्रमण हटाया भी था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह अतिक्रमण बढ़ गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई और कलेक्टर से कहा था कि वह एक जॉइंट टास्क फोर्स बनाए और हाजी अली दरगाह जाने वाली सड़कों पर हुए अवैध कब्जे को हटाएं।
जिसके बाद दरगाह ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे हटाने में असमर्थता जताई थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।
हाजी अली दरगाह में पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार है। 15th सेन्चुरी की यह दरगाह मुंबई के साउथ एरिया वर्ली में समुद्र तट से करीब 500 मीटर अंदर छोटे-से टापू पर है।
हाजी अली शाह एक सूफी पीर थे, जो इस्लाम के प्रचार के लिए ईरान से भारत आए थे।
उनकी दरगाह से हर धर्म के लोगों की आस्था जुड़ी है।
1949 में अरब सागर में बड़ा भूकंप आया था, जिससे समुद्र में सुनामी लहरें उठी थीं। इन लहरों में कई इमारतें तबाह हो गई थीं। लेकिन हाजी अली दरगाह की इमारत को कोई भी नुकसान नहीं हुआ......
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