नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे पर हैं। वह पहले भारतीय पीएम हैं, जिन्होंने इस यहूदी देश की सरजमीं पर पैर रखा है। पुराने प्रधानमंत्रियों के इजरायल न जाने की कई वजहें रहीं, लेकिन मोदी की इस पहल का स्वागत होना चाहिए। कूटनीतिक और सामरिक नजरिए से इस यात्रा का अपना महत्व है। आमतौर पर जब पीएम मोदी जब किसी देश की यात्रा पर जाते हैं तो मीडिया में चर्चा होती है कि इतने करोड़ की आर्म्स डील, इतने बिलियन का कारोबार, वीजा वगैरह वगैरह। पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर भी ये बातें हो रही हैं, लेकिन अन्य देशों के दौरों की तरह यहां बात सिर्फ इन्हीं बातों तक सीमित नहीं हैं।
इजरायल दौरे को लेकर देश के आम नागरिकों में भी उत्सुकता दिख रही है। वे रोमांचित हैं कि पीएम उसी छोटे से इजरायल गए हैं जो अपने दुश्मन को पाताल में जाकर भी उड़ा देता है। इजरायल अपने दुश्मन को पीछा आखिरी सांस तक करता है। ऐसा एक मामला 2010 में देखने को मिला, जब मोसाद (इजरायली इंटेलिजेंस एजेंसी) के एजेंटों ने हमास को हथियार बेचने वाले महमूद अल मबूह नाम के शख्स की दुबई के बेहद सुरक्षित समझने जाने वाले इलाके में हत्या कर दी थी। आपको जानकर हैरानी होगी इस शख्स को मोसाद ने 20 साल पीछा किया था।
इजरायल 1947 में राष्ट्र बना और भारत भी इसी वर्ष आजाद हुआ। दोनों देशों ने एक ही साथ विकास यात्रा शुरू की। लेकिन आज इजरायल का विश्व जगत में जो दर्जा है, वह ''परीलोक'' के जैसा है, शायद इंद्र के स्वर्ग की तरह या अलादीन के चिराग वाले जिन्न की तरह, जहां कुछ भी संभव है। क्षेत्रफल में हमारे राजस्थान के तीसरे हिस्सा जितना इजरायल रेगिस्तान में मछलियां पाल रहा है। उसके मिसाइल डिफेंस सिस्टम का अमेरिका भी लोहा मानता है।
इजरायल अब तक 8 बड़े युद्ध लड़ चुका है, लेकिन कभी हारा नहीं। खुद पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एक रैली में कहा था कि अब तक जो बातें इजरायल के बारे में सुनते थे, आज वो काम भारतीय सेना कर रही है। यह बात सिर्फ भारतीय पीएम ही नहीं बल्कि दुनिया का हर शख्स बड़े ही विश्वास के साथ कह सकता है कि इजरायल मतलब कुछ असंभव नहीं।
भारत में मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद को जब भी इंसाफ के कटघरे में लाने की बात आती है, तब इजरायल का ही जिक्र आता है। गली-मोहल्ले, नुक्कड़, चाय की दुकान से लेकर भारत की संसद तक एक ही उदाहरण दिया जाता है। अगर इजरायल होता, तो दाऊद और सईद को पाकिस्तान में ढेर कर चुका है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उसके पास क्षमता तो है ही, साथ ही इच्छाशक्ति भी है।
यह बात सच है कि पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो इजरायल गए हैं, लेकिन यह भी सच है कि इजरायल ने हमेशा भारत का साथ दिया है। इजरायल ऐसा दोस्त है, जिसे अगर आज रात को पीएम मोदी कह दें कि मुझे दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद चाहिए तो 24 घंटे के अंदर इन गुनहगारों को जिंदा या मुर्दा भारत के सुपुर्द कर देगा........
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